Saturday, July 01, 2017

शिवजी का जन्म कैसे हुआ | Birth Of Shiv ji By shiv puran in hindi

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देवों के देव महादेव अर्थात शिव जी को कहा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं की शिव जी को देवों का देव क्यों कहा जाता है| कौन इस ब्रह्माण्ड में पहले आया, ब्रम्हा विष्णु या महेश(शिव जी)| शिव जी का जन्म कैसे हुआ था ( shiv ji ka janm kaise hua). शिव जी की उत्पत्ति कैसे हुई थी, शिव जी कैसे पैदा हुए थे, शिव जी के माता और पिता का क्या नाम था| ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब हर कोई जानना चाहता है और शिव पुराण की कथाओ का अध्यन करना चाहता है|

आप यहाँ जो भी पढेंगे वो मैं यूँ ही नहीं बता रही हूँ उसके पीछे कोई न कोई तथ्य है और कारण है| यह किसी न किसी ग्रन्थ से जुदा हुआ है| शिव जी का जैम कैसे हुआ इसका उत्तर आपको शिव पुराण में देखने को मिल जायेगा| लेकिन आप अगर पढने बैठेंगे तो आपको अधिक वक्त देना होगा तो चलिए जानते हैं की आखिर शिव जी कैसे पैदा हुए थे|

अगर आप कोई भी पुराण या ग्रन्थ पढ़ेंगे तो आपको कहीं भी यह नहीं पता चलेगा कि शिव जी कब और कैसे पैदा हुए थे। दरअसल हम सभी इतना जानते हैं कि ब्रम्हांड में एक शक्ति पहले से ही स्थित थी, जिसे ईश्वर के नाम से भी जानते हैं, और जिसका कोई न तो आकार था न ही कोई स्वरुप, यही शक्ति शिवजी का निष्कल रूप थी।

लेकिन अभी तक न तो ब्रम्हांड में कोई जीव था न ही जंतु, एक बार ईश्वर ( शिव जी) ने श्रष्टि की रचना करने के बारे में सोचा, तब उन्होंने विष्णु जी को बनाया और विष्णु जी की नाभि से उन्होंने कमल पैदा किया फिर ब्रह्मा जी का जन्म हुआ, विष्णु जी पाताल में रहते और ब्रम्हा जी समुद्र के ऊपर । इसी कारण से एक दूसरे के होने का पता भी नहीं चला।

एक दिन जब विष्णु जी सैया पर लेटे हुए थे तभी वहां पर ब्रम्हा जी आ गए और विष्णु जी से पुत्र कहकर बोलने लगे और कहा, हे! पुत्र उठो मैं तुम्हारा ईश्वर हूँ और मेरी पूजा करो। इस बात पर विष्णु जी ने भी कह दिया कि हे! पुत्र मैं तुम्हारा ईश्वर हूँ और तुम्हारा जन्म ही मेरी नाभि से हुआ है, इसलिए तुम मेरी पूजा करो।
दोनों में बहस बहुत अधिक बढ़ गयी , बहस होते होते दोनों एक दूसरे से लड़ने लगे और युद्ध होने लगा। ब्रह्मा जी ने विष्णु की छाती पर प्रहार किया, तो विष्णु जी ने भी ब्रह्मा जी पर करारा प्रहार किया।

दोनों में युद्ध बहुत बढ़ गया, तब ईश्वर को प्रतीत हुआ कि उन्हें इस युद्ध को शान्त करवाना चाहिए। परंतु किसी को यह पता नहीं था कि इनके अलावा भी कोई इस ब्रह्माण्ड में उपस्थित है।

तभी ईश्वर अर्थात शिवजी ने एक विराट स्तम्भ का रूप लिया और अचानक ब्रम्हा और विष्णु के बीच आ गए। यह स्तम्भ सूर्य की तरह प्रकाशवान था। इससे भीषण आग और तेज़ रोशनी निकल रही थी, आग निकलने के कारण दोनों अलग हो गए और तब उन्हें प्रतीत हुआ की उनके बीच में यह क्या आ गया।

यह शिवजी का लिंगरूप था। अब दोनों आश्चर्य में आ गए की ये विशाल स्तम्भ कहाँ से आ गया, जब इस ब्रह्माण्ड में हम दोनों ही हैं तब यह स्तम्भ किसने प्रकट किया।

ब्रह्मा जी बोले: जो इस स्तम्भ का पता करेगा वही श्रेष्ठ होगा और वही ईश्वर कहा जायेगा।

इसका पता लगाने के लिए विष्णु जी स्तम्भ के नीचे गए और ब्रह्मा जी स्तम्भ के ऊपर गए। विष्णु जी ने शूकर का रूप लिया और नीचे की ओर गए, ब्रम्हा जी ने हंस का रूप लिया और ऊपर की तरफ गए।
विष्णु जी नीचे जाते जा रहे थे , लेकिन उन्हें कोई अंत नहीं मिला, तब उन्होंने सोचा की अब मैं हार गया, और ब्रह्मा जी ईश्वर कहलायेंगे।

ठीक ऐसे ही ब्रह्मा जी भी ऊपर जाते जा रहे थे, लेकिन उन्हें कोई अंत नहीं मिला, फिर उन्होंने केतकी का फूल देखा और उसे सबूत के तौर पर ले आये। लेकिन वो जानते थे की यह सच नहीं है।

दोनों एक स्थान पर आ गए , और तब विष्णु जी ने कहा कि मुझे अंत नहीं मिला, पर ब्रह्मा जी ने झूठ बोलते हुए कहा कि मुझे अंत मिल गया, फिर उन्होंने कहा कि मैंने स्तम्भ के ऊपर इस पुष्प को पाया। तब विष्णु जी ब्रह्मा जी के पैरों पर गिर गए।

यह सारा वृतान्त शिवजी देख और सुन रहे थे, ब्रह्मा जी को झूठ बोलता देख शिव जी को प्रकट होना पड़ा, तब उन्होंने पहली बार अपना साकार रूप दिखाया। उन्होंने बताया कि मैं ही सब हूँ, जो कुछ भी हो रहा है , मेरे द्धारा हो रहा है, मैंने ही तुम दोनों को जन्म दिया है, मैं ही ईश्वर हूँ और तुम मेरी पूजा करो।

उन्होंने बताया कि यह स्तम्भ मेरा ही निष्कल रूप है जिसका कोई आकार नहीं, और न ही इसका कोई अंत है, मैं ही हूँ जिसके दो रूप हो सकते हैं, एक तो मेरा साकार रूप जिसमे तुम मुझे देख रहे हो और दूसरा मेरा लिंग रूप, जो निष्कल रूप है। हे ब्रम्हा तुम झूठ बोल रहे हो, कि तुमने इस स्तम्भ का अंत देखा।

तो आप सभी ने जाना कि आखिर शिव जी की उत्पत्ति कैसे हुई और कैसे ब्रह्मा जी और विष्णु जी में युद्ध हुआ। यह सारा तथ्य शिव पुराण के अनुसार है, इसके आगे की  भी कहानी है, जिसमे ब्रह्मा जी के झूठ बोलने पर उन्हें सजा दी गयी|

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